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भीष्म पर्व
अध्याय १०२
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सञ्जय़ उवाच
अवध्यानां वधं कृत्वा राज्यं वा नरकोत्तरम् |  ३६   क
दुःखानि वनवासे वा किं नु मे सुकृतं भवेत् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति