भीष्म पर्व  अध्याय १०२

सञ्जय़ उवाच

एह्येहि पुण्डरीकाक्ष देवदेव नमोऽस्तु ते |  ६०   क
मामद्य सात्वतश्रेष्ठ पातय़स्व महाहवे ||  ६०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति