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द्रोण पर्व
अध्याय १०२
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सञ्जय़ उवाच
नूनमार्या महत्कुन्ती पापमद्य निदर्शनम् |  ६१   क
द्रौपदी च सुभद्रा च पश्यन्ति सह वन्धुभिः ||  ६१   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति