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आदि पर्व
अध्याय ५३
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सूत उवाच
भूय़ो भूय़ः सर्वशस्तेऽव्रुवंस्तं; किं ते प्रिय़ं करवामोऽद्य विद्वन् |  १९   क
प्रीता वय़ं मोक्षिताश्चैव सर्वे; कामं किं ते करवामोऽद्य वत्स ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति