वन पर्व  अध्याय १४६

वैशम्पाय़न उवाच

एवमुक्त्वा तु पाञ्चाली भीमसेनमनिन्दिता |  १२   क
जगाम धर्मराजाय़ पुष्पमादाय़ तत्तदा ||  १२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति