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अनुशासन पर्व
अध्याय १४
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उपमन्युरु उवाच
योऽसृजद्दक्षिणादङ्गाद्व्रह्माणं लोकसम्भवम् |  १८३   क
वामपार्श्वात्तथा विष्णुं लोकरक्षार्थमीश्वरः |  १८३   ख
युगान्ते चैव सम्प्राप्ते रुद्रमङ्गात्सृजत्प्रभुः ||  १८३   ग
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति