शान्ति पर्व  अध्याय १४०

भीष्म उवाच

यस्य दस्युगणा राष्ट्रे ध्वाङ्क्षा मत्स्याञ्जलादिव |  २८   क
विहरन्ति परस्वानि स वै क्षत्रिय़पांसनः ||  २८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति