वन पर्व  अध्याय २९७

वैशम्पाय़न उवाच

एतेनाध्यवसाय़ेन तत्तोय़मवगाढवान् |  १०   क
गाहमानश्च तत्तोय़मन्तरिक्षात्स शुश्रुवे ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति