शान्ति पर्व  अध्याय १०३

भीष्म उवाच

क्षमा वै साधुमाय़ा हि न हि साध्वक्षमा सदा |  २९   क
क्षमाय़ाश्चाक्षमाय़ाश्च विद्धि पार्थ प्रय़ोजनम् ||  २९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति