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शान्ति पर्व
अध्याय १०३
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भीष्म उवाच
गम्भीरशव्दाश्च महास्वनाश्च; शङ्खाश्च भेर्यश्च नदन्ति यत्र |  ९   क
युय़ुत्सवश्चाप्रतीपा भवन्ति; जय़स्यैतद्भाविनो रूपमाहुः ||  ९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति