अनुशासन पर्व  अध्याय १०३

भीष्म उवाच

कस्यचित्त्वथ कालस्य भाग्यक्षय़ उपस्थिते |  १०   क
सर्वमेतदवज्ञाय़ न चकारैतदीदृशम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति