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उद्योग पर्व
अध्याय १०३
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गरुड उवाच
असह्यं सर्वभूतानां ममापि विपुलं वलम् |  ११   क
मय़ापि सुमहत्कर्म कृतं दैतेय़विग्रहे ||  ११   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति