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द्रोण पर्व
अध्याय १६
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सञ्जय़ उवाच
एष च भ्रातृभिः सार्धं सुशर्माह्वय़ते रणे |  ४०   क
वधाय़ सगणस्यास्य मामनुज्ञातुमर्हसि ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति