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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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अर्जुन उवाच
श्रुतं ते कुरुमुख्यस्य नाहं हन्यां शिखण्डिनम् |  १००   क
कन्या ह्येषा पुरा जाता पुरुषः समपद्यत ||  १००   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति