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भीष्म पर्व
अध्याय ३३
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अर्जुन उवाच
अनादिमध्यान्तमनन्तवीर्य; मनन्तवाहुं शशिसूर्यनेत्रम् |  १९   क
पश्यामि त्वां दीप्तहुताशवक्त्रं; स्वतेजसा विश्वमिदं तपन्तम् ||  १९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति