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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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सञ्जय़ उवाच
तव भ्राता मम सखा सम्वन्धी शिष्य एव च |  ३३   क
मांसान्युत्कृत्य वै दद्यामर्जुनार्थे महीपते ||  ३३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति