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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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युधिष्ठिर उवाच
सेन्द्रानपि रणे देवाञ्जय़ेय़ं जय़तां वर |  ४२   क
त्वय़ा नाथेन गोविन्द किमु भीष्मं महाहवे ||  ४२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति