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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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श्रीकृष्ण उवाच
ज्याय़ांसमपि चेच्छक्र गुणैरपि समन्वितम् |  ९५   क
आतताय़िनमामन्त्र्य हन्याद्घातकमागतम् ||  ९५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति