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भीष्म पर्व
अध्याय १०३
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अर्जुन उवाच
शिखण्डी निधनं कृष्ण भीष्मस्य भविता ध्रुवम् |  ९७   क
दृष्ट्वैव हि सदा भीष्मः पाञ्चाल्यं विनिवर्तते ||  ९७   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति