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द्रोण पर्व
अध्याय १०३
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सञ्जय़ उवाच
अर्जुनं तत्र दृष्ट्वाथ चुक्रोश महतो रवान् |  २६   क
तं तु तस्य महानादं पार्थः शुश्राव नर्दतः ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति