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द्रोण पर्व
अध्याय १०३
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सञ्जय़ उवाच
गन्धर्वराजं वलिनं दुर्योधनकृतेन वै |  ४०   क
जितवान्योऽस्त्रवीर्येण दिष्ट्या पार्थः स जीवति ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति