सभा पर्व  अध्याय १४

कृष्ण उवाच

हित्वा करान्यौवनाश्वः पालनाच्च भगीरथः |  ११   क
कार्तवीर्यस्तपोय़ोगाद्वलात्तु भरतो विभुः |  ११   ख
ऋद्ध्या मरुत्तस्तान्पञ्च सम्राज इति शुश्रुमः ||  ११   ग
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति