आदि पर्व  अध्याय १०४

वैशम्पाय़न उवाच

स वर्धमानो वलवान्सर्वास्त्रेषूद्यतोऽभवत् |  १६   क
आ पृष्ठतापादादित्यमुपतस्थे स वीर्यवान् ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति