आदि पर्व  अध्याय १०४

वैशम्पाय़न उवाच

पैतृष्वसेय़ाय़ स तामनपत्याय़ वीर्यवान् |  २   क
अग्र्यमग्रे प्रतिज्ञाय़ स्वस्यापत्यस्य वीर्यवान् ||  २   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति