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शान्ति पर्व
अध्याय १०४
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भीष्म उवाच
माय़ाविभेदानुपसर्जनानि; पापं तथैव स्पशसम्प्रय़ोगात् |  ४०   क
आप्तैर्मनुष्यैरुपचारय़ेत; पुरेषु राष्ट्रेषु च सम्प्रय़ुक्तः ||  ४०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति