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अनुशासन पर्व
अध्याय १०४
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राजन्य उवाच
चण्डाल प्रतिजानीहि येन मोक्षमवाप्स्यसि |  २६   क
व्राह्मणार्थे त्यजन्प्राणान्गतिमिष्टामवाप्स्यसि ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति