वन पर्व  अध्याय १०४

लोमश उवाच

स तप्यमानः सुमहत्तपो योगसमन्वितः |  १०   क
आससाद महात्मानं त्र्यक्षं त्रिपुरमर्दनम् ||  १०   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति