वन पर्व  अध्याय १०४

लोमश उवाच

स चापि सगरो राजा जगाम स्वं निवेशनम् |  १६   क
पत्नीभ्यां सहितस्तात सोऽतिहृष्टमनास्तदा ||  १६   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति