वन पर्व  अध्याय १०४

लोमश उवाच

स पुत्रकामो नृपतिस्तताप सुमहत्तपः |  ९   क
पत्नीभ्यां सह राजेन्द्र कैलासं गिरिमाश्रितः ||  ९   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति