उद्योग पर्व  अध्याय १०४

जनमेजय़ उवाच

अनर्थे जातनिर्वन्धं परार्थे लोभमोहितम् |  १   क
अनार्यकेष्वभिरतं मरणे कृतनिश्चय़म् ||  १   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति