आदि पर्व  अध्याय ९४

वैशम्पाय़न उवाच

इदं तु वचनं सौम्य कार्यं चैव निवोध मे |  ८२   क
कौमारिकाणां शीलेन वक्ष्याम्यहमरिन्दम ||  ८२   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति