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उद्योग पर्व
अध्याय १०४
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नारद उवाच
निर्वन्धतस्तु वहुशो गालवस्य तपस्विनः |  २५   क
किञ्चिदागतसंरम्भो विश्वामित्रोऽव्रवीदिदम् ||  २५   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति