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भीष्म पर्व
अध्याय १०४
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सञ्जय़ उवाच
अर्जुनप्रमुखाः पार्थाः पुरस्कृत्य शिखण्डिनम् |  १८   क
भीष्मं युद्धेऽभ्यवर्तन्त किरन्तो विविधाञ्शरान् ||  १८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति