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भीष्म पर्व
अध्याय १०४
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सञ्जय़ उवाच
तद्दृष्ट्वा समरे कर्म तव पुत्रा विशां पते |  ३६   क
विस्मय़ं परमं प्राप्ताः पितामहमपूजय़न् ||  ३६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति