वन पर्व  अध्याय १५६

वैशम्पाय़न उवाच

अव्भक्षा वाय़ुभक्षाश्च प्लवमाना विहाय़सा |  १५   क
जुषन्ते पर्वतश्रेष्ठमृषय़ः पर्वसन्धिषु ||  १५   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति