menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
chevron_left
chevron_right
धृतराष्ट्र उवाच
न हि पश्याम्यहं तं वै त्रिषु लोकेषु सञ्जय़ |  २   क
क्रुद्धस्य भिमसेनस्य यस्तिष्ठेदग्रतो रणे ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति