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द्रोण पर्व
अध्याय १०४
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सञ्जय़ उवाच
तस्य भीमो भृशं क्रुद्धस्त्रीञ्शरान्नतपर्वणः |  २२   क
निचखानोरसि तदा सूतपुत्रस्य वेगितः ||  २२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति