menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
द्रोण पर्व
अध्याय १०४
chevron_left
chevron_right
सञ्जय़ उवाच
हताश्वात्तु रथात्कर्णः समाप्लुत्य विशां पते |  २८   क
स्यन्दनं वृषसेनस्य समारोहन्महारथः ||  २८   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति