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द्रोण पर्व
अध्याय १०४
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सञ्जय़ उवाच
तस्य तं निनदं श्रुत्वा प्रहृष्टोऽभूद्युधिष्ठिरः |  ३०   क
कर्णं च निर्जितं मत्वा भीमसेनेन भारत ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति