आदि पर्व  अध्याय १०५

वैशम्पाय़न उवाच

खरोष्ट्रमहिषांश्चैव यच्च किञ्चिदजाविकम् |  १८   क
तत्सर्वं प्रतिजग्राह राजा नागपुराधिपः ||  १८   ख
अनुवाद

अकृत-अनुवादम्

टीका

टीका नास्ति