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आदि पर्व
अध्याय १०५
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वैशम्पाय़न उवाच
यात्वा देवव्रतेनापि मद्राणां पुटभेदनम् |  ४   क
विश्रुता त्रिषु लोकेषु माद्री मद्रपतेः सुता ||  ४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति