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शान्ति पर्व
अध्याय १०५
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भीष्म उवाच
पुरस्तादेव ते वुद्धिरिय़ं कार्या विजानतः |  १२   क
अनित्यं सर्वमेवेदमहं च मम चास्ति यत् ||  १२   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति