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शान्ति पर्व
अध्याय १०५
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भीष्म उवाच
ये तु विंशतिवर्षा वै त्रिंशद्वर्षाश्च मानवाः |  २०   क
अर्वागेव हि ते सर्वे मरिष्यन्ति शरच्छतात् ||  २०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति