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शान्ति पर्व
अध्याय १०५
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राजपुत्र उवाच
तस्यैवं ह्रिय़माणस्य स्रोतसेव तपोधन |  २६   क
फलमेतत्प्रपश्यामि यथालव्धेन वर्तय़े ||  २६   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति