menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
शान्ति पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
मुनिरु उवाच
पुरस्ताद्भूतपूर्वत्वाद्धीनभाग्यो हि दुर्मतिः |  ३०   क
धातारं गर्हते नित्यं लव्धार्थांश्च न मृष्यते ||  ३०   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति