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अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
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भीष्म उवाच
कर्मभिः पार्थ नानात्वं लोकानां यान्ति मानवाः |  २   क
पुण्यान्पुण्यकृतो यान्ति पापान्पापकृतो जनाः ||  २   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति