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अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
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धृतराष्ट्र उवाच
ये नृत्तगीतकुशला जनाः सदा; ह्ययाचमानाः सहिताश्चरन्ति |  २४   क
तथाविधानामेष लोको महर्षे; परं गन्ता धृतराष्ट्रो न तत्र ||  २४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति