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अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
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धृतराष्ट्र उवाच
तथाविधानामेष लोको महर्षे; विशुद्धानां भावितवाङ्मतीनाम् |  ३४   क
सत्ये स्थितानां वेदविदां महात्मनां; परं गन्ता धृतराष्ट्रो न तत्र ||  ३४   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति