menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
गौतम उवाच
यत्र शीतभय़ं नास्ति न चोष्णभय़मण्वपि |  ४९   क
न क्षुत्पिपासे न ग्लानिर्न दुःखं न सुखं तथा ||  ४९   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति