menu
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
বাংলা
महाभारत
शब्दसूची
श्लोकपादसूची
About Us
अनुशासन पर्व
अध्याय १०५
chevron_left
chevron_right
धृतराष्ट्र उवाच
ते व्रह्मभवनं पुण्यं प्राप्नुवन्तीह सात्त्विकाः |  ५३   क
न तत्र धृतराष्ट्रस्ते शक्यो द्रष्टुं महामुने ||  ५३   ख
अनुवाद
अकृत-अनुवादम्
टीका
टीका नास्ति